Tere Mere Pal

Har Waqt Badalta Pal!

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! भवरों को फूलों पे चहकते देखा है !

भवरों को फूलों पे चहकते देखा है बिन मौसम पतझर देखा है कहते है ज़माने वाले ये तो बेजान है हमने पल भर में तुमको बदलते देखा है ये कहना कही बईमानी होगी हम भी बदल गए…जिसने सबको बदलते देखा है ! Written by : Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! बेरंग सा लगता है…ये रंगो भरा जमाना !

बेरंग सा लगता है…ये रंगो भरा जमाना दर्द है इस दिल में….मस्ती भरा फ़साना झूमता रहू अपनों संग…खुद को है भूल जाना बेरंग सा लगता है…ये रंगो भरा जमाना कहने को सब है यहाँ…पर मिलता कहाँ जो है पाना एक बड़ी कीमत पे…होता है कुछ जो पाना बेरंग सा लगता है…ये रंगो भरा जमाना ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! गुजरा जमाना तेरा फ़साना !

गुजरा जमाना तेरा फ़साना क्या थी हकीकत किसी ने न जाना कहने को वो मौसम बड़ा ही सुहाना सब के लबों पे बस वही फ़साना दर्द थी दिल में सभी संग गुनगुनाना कहने को वो मौसम बड़ा ही सुहाना गुजरा जमाना तेरा फ़साना क्या थी हकीकत किसी ने न जाना ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! सर्द का मौसम धुप में नमी थी !

सर्द का मौसम धुप में नमी थी अपनों का संग पर बातों में कमी थी उस पल को कहु तो क्या कहु लंबी सफर की यादें बाते बड़ी थी सर्द का मौसम धुप में नमी थी अपनों का संग पर बातों में कमी थी ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! दिल अपना तुझे दिखा देंगे !

सोचा था कभी तो मिलेंगे दर्दे – दिल होता है क्या बतलादेंगे रो कर आँसू बहाना हमें आता नहीं वक़्त आने पर दिल अपना तुझे दिखा देंगे जख्म देकर तुम कहते हो हमने तुमपे सितम की है सितम होता है क्या…ये बता देंगे वक़्त आने पर दिल अपना तुझे दिखा देंगे ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! वक़्त कम मंजिल दूर नजर आती है !

बड़ी उलझन में हुँ…करू तो क्या करू वक़्त कम मंजिल दूर नजर आती है थक जाता हुँ….जब भी…कभी अकेला खुद को पाता हुँ तेरी यादे है जो एक उम्मीद जागती है तभी थक कर भी…मंजिल को निकल जाता हुँ बड़ी उलझन में हुँ…करू तो क्या करू वक़्त कम मंजिल दूर नजर आती है ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! उस पल को कहे तो क्या कहे !

उस पल को कहे तो क्या कहे जिससे हमेसा हम भागते रहे अक़सर टकरा जाते है उसी मोड़ पे जहां जख्मो पे मरहम लगते रहे वो वक़्त ही कुछ ऐसा था जिसे हम मरहम समझ बैठे थे वो मरहम जख्मों को फैलाते रहे ! FacebookTwitterGoogle+

! वो इंकार कर गए…ये कह कर हम तुम्हें जानते नहीं !

वो इंकार कर गए…ये कह कर हम तुम्हें जानते नहीं आज जिन्हे हम ही हम नजर आते है कहते है… आप कैसा जादू चलाते है ख्वाबो में भी हर पल मुझे बड़ा सताते है वक़्त का ये दौड़ कैसा… हम मशगूल अपनों संग…वो हम पे वक़्त बिताते है ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! मान ली अब हार मैंने !

मान ली अब हार मैंने दिल जो तुझसंग लगाई है जग छोड़ी सब छोड़ी… नींद भी गवाई है जान गया दिल…मान गया दिल ये सब तो बीमारी है उम्र कहुँ या हालत इसे सबको गुजारनी बारी बारी है ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! दिल का चैन रूह का सकु खो जाता है !

दिल का चैन रूह का सकु खो जाता है महफ़िल में दिल न जाने कही खो जाता है होता है क्या ये मोहब्बत जिसे भी लगता है ये रोग इस भीड़ भरी दुनिया में नजाने कही खो जाता है ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

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