Tere Mere Pal

Har Waqt Badalta Pal!

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! जद्द ओ जहद में हुँ…करू मैं क्या !

जद्द ओ जहद में हुँ…करू मैं क्या दिल शीशे का है…कही टूट न जाये सबको देखा है हँसते हुए कही रब रूठ न जाये टूट कर बिखरा हुँ… जानता हुँ दर्द है क्या बड़ी नाजुक सी है….कही साँसे छूट न जाये जद्द ओ जहद में हुँ…करू मैं क्या दिल शीशे का है…कही टूट न जाये ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! दर्द संग दिल की मुलाकात थी !

सर्द की मौसम रात काली और बरसात की थी…दर्द दिल में लबो पे बातऔर जज्बात की थी….तन्हा थे हम… न साथ किसी का दर्द संग दिल की मुलाकात थी ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! बातें दिल की सुन्ने लगा !

बातें दिल की सुन्ने लगा हर पल तुझ संग जुड़ने लगा धड़कने लगा फिर दिल मेरा तुझ संग प्यार करने लगा हर नजरों में तुझको देखू तुझ संग आहें भरने लगा धड़कने लगा फिर दिल मेरा तुझ संग प्यार करने लगा ! Written by Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! वक़्त की लहरों मैं चलता रहा !

वक़्त की लहरों मैं चलता रहा जख्मी था दिल मैं लड़ता रहा मोड़ कुछ ऐसा आया…तेरे इस ज़माने मैं मुस्कुराना सिख लिया…हर एक बहाने मैं कहते है तुम यु मुस्कुराते क्यूँ हो हर जख्म मुझसे छुपाते क्यूँ हो दिल को दिल में दबाते क्यूँ हो नजरें हमसे बचाते क्यूँ हो कैसे कहे जख्म ये तेरा है जिसे तुझसे छुपता हुँ …Continue reading →

! सफ़र लम्बा था…मंजिल करीब आ रही थी !

सफ़र लम्बा था…मंजिल करीब आ रही थी दिल की धड़कनो को फिर भी कुछ अनसुनी बातों का एहसास हो रहा था मिलना तो नसीब था हमारा और फिजाओ में रुख बदल रही थी और दिल को एहसास हो रहा था मिलना तो नसीब था हमारा तभी हमारा दिल एक दूजे के करीब आ रहा था ! Written by: Abhishek Verma …Continue reading →

! मंजिल तुझे बना…दर बदर भटकता रहा !

मंजिल तुझे बना…दर बदर भटकता रहा काफ़िले साथ…तन्हा मगर चलता रहा तकती रही निगाहें तेरी रहो को हर गली हर गलियारों को भूले बिसरे बातों को याद करता रहा मंजिल तुझे बना…दर बदर भटकता रहा ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! कैसे कटेगी जिंदगी तुम बिन !

कैसे कटेगी जिंदगी तुम बिन राह लम्बा सफ़र तन्हा अकेला नजर आता है इस धड़कन पे तेरा पहरा नजर आता है सोच कर घबड़ा जाता हुँ कैसे सम्भालू इस दिल को तुम बिन दिल ठहरा नजर आता है ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! एक हसी ख़्वाब की परी हुँ मैं !

एक हसी ख़्वाब की परी हुँ मैं मस्त मग्न सबकी सहेली हुँ मैं टिमटिमाती जुगनू की तरह चाँद की सहेली हुँ मैं….. सबके दिलों में धड़कू वो पहेली हुँ मैं आँगन जैसे घर की सब से जड़ी हुँ है…. एक हसी ख़्वाब की परी हुँ मैं मस्त मग्न सबकी सहेली हुँ मैं ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

! दर्द कितने है इस दिल में !

दर्द कितने है इस दिल में मैं कैसे तुझे बताऊ… अब धरकन भी कह रही है बिन तुम न जी पाउ…. दर्द कितने है इस दिल में मैं कैसे तुझे बताऊ… तेरी झुल्फों की घनी छाओं में चुपके से गुम हो जाऊ… दर्द कितने है इस दिल में मैं कैसे तुझे बताऊ… जिक्र तेरा करू मैं खुद ही खुद में ही …Continue reading →

! धुंद में कही खो रहा…पल तेरे मेरे साथ का !

धुंद में कही खो रहा…पल तेरे मेरे साथ का कह रही है धड़कने …पल ये न मिलेगा प्यार का जा रही दूर कहीं…. जो थी ज़िन्दगी हमारी कैसे जिए सनम बिन ….पल न होगा ऐतबार का ! Written by: Abhishek Verma FacebookTwitterGoogle+

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